डंगवाल ब्राह्मण जाति का इतिहास
उत्तराखंड में डंगवाल ब्राह्मण जाति के उदय से डांग, पाली व नाण्डी पाब ग्रामसभा तक का वर्णन ।
यह इतिहास केवल डंगवाल (ब्राह्मण) जाति के लोगों से सम्बंधित है । इसमें किसी भी उत्तराखंड के इतिहासकार को सम्मिलित नही किया गया है क्योंकि उत्तराखंड का इतिहास इतिहासकारों ने मनगढ़ंत लिखा हुआ है, जब आप तथ्य खंगालते हैं तो वह उस वक्त की घटित घटनाओं से मेल ही नही खाता और पढ़ने वाला व्यक्ति भ्रमित हो जाता है । कई लोग जिनको सही ज्ञान नही है या विश्लेषण करने की क्षमता नही है, उसी को सच मान लेते हैं । इस पुस्तक में जितना भी लिखा गया है वह सामग्री राहुल सांस्कृतियन के लेखों व डंगवाल वँश के पूर्वजों से प्राप्त की गयी है । राजा प्रदीप शाह के राज्यकाल मे उनके धर्माध्यक्ष हुए मेधाकर शर्मा, जिन्होने रामायन प्रदीप महाकाव्य की रचना की । इसी महाकाव्य से मैने प्रदीप शाह से सम्बन्धित जानकारी प्राप्त की है । इस पुस्तक को लिखने में मुझे बहुत समय लग गया क्योंकि वँश ज्ञान एकत्रित करना वह भी जब कई पीढ़ियों में वह ज्ञान आगे नही बढ़ा हो, एक चुनौति था । वहीं कभी कभी मैं अपने इस लेखन कार्य से भटक भी गया । जितना मुझे सत्य व शाक्षी लगा मैं आपके सामने रख रहा हूँ । आने वाले समय मे मेरा यह कार्य जारी रहेगा और डंगवाल डांग वँश की और अधिक जानकारी लेकर मैं इसको अपडेट करके द्वितीय संस्करण में परिवर्तित करने का सफलतम प्रयास करूंगा ।
| डंगवाल वंशावली पुस्तक लेखक - श्री दिगम्बर डंगवाल मुल्य- निःशुल्क (पीडीएफ) |







