कहीं दूर झरनों में नहा के आयी है
मेरे आंगन में पेड़ो के झरोखों से ।
हर प्राणी में नव जीवन खिल आया
नजरों में तेरे झिलमिलाने से ।।

चिड़ियाओं का भी कौतोहल है
जैसे सहनाई बज उठी है दिशाओं में ।
और आँगन यूँ खिल उठा है
जैसे नई - नई दुल्हन घर पधारी है ।।

उन्माद नया सा जाग उठा फिर
जीवन अपने रास्तों पर निकल चला है ।
कुछ उम्मीद में बुन रहे घर-घोसले
कारवाँ जिंदगी का आगे बढ़ रहा है ।।

#दिगम्बर डंगवाल