आज नही, कल नही, फिर किसी गस्त पर सही
मिलना तो है मुझे, हाँ मिलना तो है मुझे तुमसे
पर आज अभी इसी वक्त! ये जरूरी तो नही ।।

        वक्त तेरा या वक्त मेरा मुकम्मल नही या मुनासिब नही
        सवाल तो होंगे मुझसे भी बहुत और तुमसे भी बहुत
        पर आज अभी इसी वक्त! ये जरूरी तो नही ।।

आ बैठ मेरे पास, पर न अपनी सुना न मेरी सुन
कुछ तो वक्त ने सोचा होगा तेरा भी और मेरा भी
पर आज अभी इसी वक्त! ये जरूरी तो नही ।।

        कर हौसला तो चलू संग तेरे कुछ दूर कुछ पल और मैं
        फिर बिछड़ना तो सबको है, हाँ उससे दर्द मिलेगा
        पर आज अभी इसी वक्त! ये जरूरी तो नही ।।

 चींटी भी एक बार उड़ती है किसी उम्मीद पर
 मौत होगी मालूम नही, जो बरस गया अम्बर
 पर आज अभी इसी वक्त! ये जरूरी तो नही ।।

          फिर क्यों निराशा को ओढ़ते हो पलकों पर बेवजह
          समय घूमेगा और दशा बदलेगी तेरी भी और मेरी भी
          पर आज अभी इसी वक्त! ये जरूरी तो नही ।।

#दिगम्बर डंगवाल