मैं यहां क्यूँ हूँ ये सिर्फ मैं जानता हूँ
जो सोचते है मेरी सख्सियत कुछ नही
इतना कह दूँ, मैं तुम्हें भी पहचानता हूँ
हां, मैं कौन हूँ ! ये सिर्फ मैं जानता हूँ ।

बीते हुए वक्त को बखूबी भांपता हूँ
आने वाले वक्त से मेरा वास्ता जानता हूँ
लूट गई जो मौज मुझसे, अब सोचता नही
हां, मैं कौन हूँ ! ये सिर्फ मैं जानता हूँ ।

मैंने हर एक को सही राह दिखाई
पूछने वालों को मैं आज भी पहचानता हूँ
फिर भी तुम सोचते हो मैं वहीं पर खड़ा हूँ
हां, मैं कौन हूँ ! ये सिर्फ मैं जानता हूँ ।

बहारें आयी और गयी, पत्ते भले झड़ गये
जो बाग उजड़ गये, मैं उन्हें भी पहचानता हूँ
मैंने रास्तों पर जिंदगी बसर कर ली तो क्या ?
हां, मैं कौन हूँ ! ये सिर्फ मैं जानता हूँ ।

# दिगम्बर डंगवाल