मैं बूंद पानी सी पत्तों पर मिलूंगा
धूल आँधी संग संग जैसी चलूँगा
जब मैं नही रहूँगा ....
धूल आँधी संग संग जैसी चलूँगा
जब मैं नही रहूँगा ....
फूलों पर भौंरा सा मंडराता दिखूंगा
पंक्षियों के झुंडों में उड़ता मिलूंगा
हवा के संग संग तिनका सा चलूँगा
जब मैं नही रहूँगा ....
पंक्षियों के झुंडों में उड़ता मिलूंगा
हवा के संग संग तिनका सा चलूँगा
जब मैं नही रहूँगा ....
काली रातों में जुगनू सा दिखूंगा
अंधेरों में उल्लू सा उड़ता मिलूंगा
चाँद बादलों सा संग संग चलूँगा
जब मैं नही रहूँगा....
जंगल में मृग सा दौड़ता दिखूंगा
या शेर जैसी गर्जना में मिलूंगा
तितलियों सा हवा संग संग चलूँगा
जब मैं नही रहूँगा....
हीर कोई उसका रांझा दिखूंगा
पाँव में पायल सी झंकार मिलूंगा
प्रेमियों की यादों संग संग चलूँगा
जब मैं नही रहूँगा....
#दिगम्बर डंगवाल

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