जज्बात जब कलम पे आने लग जाँए ।
कोई सूरत नही ढूंढता है दिल फकत
दर्द जब एहसास बन छलकने लग जाँए ।।
कोई सूरत नही ढूंढता है दिल फकत
दर्द जब एहसास बन छलकने लग जाँए ।।
कांपते है होंठ अक्सर दबी बात पर
और प्यार बढ़ जाता है अगर बातें दब जाँए ।
कोई राज फिर क्या राज रहे बाकी
जब दो दिल एक शरीर में धड़कने लग जाँए ।।
मैं गीत हूँ, मैं कहानी भी हूँ लम्हों की
न जाने कौन किन लफ्जों में समझ पाए ।
कोई इतिहास मेरा क्या गवाह रहेगा
अगर मैं आपका और आप मेरे बन जाँए ।।
और प्यार बढ़ जाता है अगर बातें दब जाँए ।
कोई राज फिर क्या राज रहे बाकी
जब दो दिल एक शरीर में धड़कने लग जाँए ।।
मैं गीत हूँ, मैं कहानी भी हूँ लम्हों की
न जाने कौन किन लफ्जों में समझ पाए ।
कोई इतिहास मेरा क्या गवाह रहेगा
अगर मैं आपका और आप मेरे बन जाँए ।।
#दिगम्बर डंगवाल

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