खुले आसमान पर मैं हवा सा
न कोई रंग है न राग मेरा,
कोई पूछेगा भी तो क्या मुझसे
न कोई देश है न धर्म मेरा ।।
कोई पूछेगा भी तो क्या मुझसे
न कोई देश है न धर्म मेरा ।।
मैं बस फिजाओं में हूँ या
तराना अफसाना है मेरा,
तुम ढूंढोगे भी कहाँ मुझे
न कोई देश है न ठिकाना मेरा ।।
मैं तेरे पास से भी गुजरता हूँ
पर एहसास नही है मेरा,
तुम छुंओगे भी तो कैसे
न कोई रूप है न स्वरूप मेरा ।।
हर गली में घर अपना है
आशियाना भी यही है मेरा,
पर हर जगह पर ढूंढ लो
न कोई डाल है न पत्ता मेरा ।।
#दिगम्बर डंगवाल

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