मिले भी थे और मिले भी नही
कुछ यही है कहानी जिंदगी
दो चार होने में वक्त निकल गया
बस मिले भी तो मतलबी ।

न तुम, तुम से रहे बाकी जिंदगी
न हम, हम रहे तुमसे जिंदगी
ये आगे बढ़ने की जो उमंग थी
बस मिले भी तो मतलबी ।

कहाँ से ढूंढोगे अपना सा यहाँ
जब तुम सा रहा न अब बाकी
मन के अंधियारों से मिला पर
बस मिले भी तो मतलबी ।

क्या खोज रहे हो अपने से परे
राजा भी यहां जब राजा न रहे
अहंकार ने सभी पर्दे गिरा दिए
बस मिले भी तो मतलबी ।
#दिगम्बर डंगवाल